बुधवार, 29 मई 2013

आज जहाँ पे गरीबी और भुखमरी एक समस्या है लोगों के सर पे छत नहीं है वही पे मुझे लगता है की सर पे छत का होना भी एक समस्या बनता जा रहा है. जिन लोगो के सर पे छत है उनके सर से छत हटने का नाम ही नहीं लेती. जिसने छत बनायीं थी उसने शायद ये सोच के नहीं बनायीं थी की २४ घंटे छत सर पे ही रहे. आज की दिनचरिया में हम ऑफिस जाते है जहाँ पे पुरे दिन छत सर पे ही होती है और उससके बाद घर में आ कर फिर छत के निचे सर रख लेते है.  इन्सान का जीवन घर और ऑफिस की छत के नीचे ही सिमटता जा रहा है. बहुत लोगो ने तो ज़माने से ये भी नहीं देखा की सूरज उगता कब है और ढलता कब है. अपनी छत के निचे लोग इतने व्यस्त है की पड़ोस में कोन रहता है इसका शायद ही पता हो. लोग एक दुसरे को केवल फॅमिली नाम से तो जानते है परतु गुप्ता जी का नाम सही में क्या है शायद ही शर्मा जी को पता हो और ये बात गुप्ता जी पर भी वैसे ही लागु होती है. आज का जीवन भविष्य को और कोशो दूर की चीजो को सुधरने में लगा है मगर अभी की और पास की चीजो को भूल रहा है. लोग सामने वाले से बात न करके फ़ोन वाले से बात करने को ज्यादा अहमियत देते है,  ये नहीं है की फ़ोन पे जो है वो ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है और सामने है वो नहीं. अगर फ़ोन और सामने वाला इन्सान पलट भी जाये तब भी हम फ़ोन पे ही बात करेंगे. क्यूँ? क्यूँ की छत से सर को अलग करना भूल गए. वास्तविक मिलना भूल गए. t.v. पे पूरी दुनिया पे नजर रखने की कोशिश जरूर होती है मगर पडोश में कोई बीमार भी हो तो मिलने का वक़्त नहीं होता. आदमी अपने आप में ही सिमटता जा रहा है और ये कोई महामारी से कम नहीं लगती, कम से कम  मुझे तो. शुक्र है ये बीमारी अभी केवल शहरो में है मगर गावों में भी बहुत तेजी से फेल रही है. अगर छत का शाया हम पे यूँ ही बना रहा तो हमारी पूरी सभ्यता ही कहीं साये में न आजाये. ये नहीं है की अगर ऐसा हुआ तो इन्सान नहीं रहेगा इन्सान तो फिर भी रहेगा मगर इन्सान की परिभासा बदल जाएगी. जिसे  हम आज इन्सान कहते है कम से कम वो इंसान नहीं रहेगा. तो मेरे प्यारे दोस्तों थोडा चार दिवारी से बहरा निकलो, केवल आज ही नहीं कुछ वक़्त रोजाना निकालो. थोडा घुमो फिरो लोगों से मिलो उनका दुःख सुख बाँटो. तुम कबूतर नहीं हो जिसको आज के दोर ने एक पिंजरे में कैद करके रख दिया है. तुम आज भी इंसान हो चाहो तो ये सूरत बदल सकते हो
हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मैं तो ये चाहता हूँ के ये सूरत बदलनी चाहिए.