मेरा रिश्ता जब एक बेवफा से जुड़ गया
जीवन का हर रास्ता फ़िर बर्बदिया पे मुड़ गया
प्राणघातक आघात था पर फ़िर भी जिन्दा रह गया
हजारो खंजर मैं अपने मासूम दिल पे सह गया
मेरे दुःख दर्द का अब तो ये आगाज़ था
आग लगाने वाला मगर मासूम दगाबाज़ था
अब भी वो मुझसे प्यार की कसमे खता था
उसका प्यार ह बड़ा पवित्र ये भी वो दरसता था
भूल जा सब मुझसे ये गलती हो गई जान
मार के मुझको कहता ह की मुझको कातिल न जान
ये सब देख के मुझ को ख़ुद पे तरस आता था
जिन्दगी का दिया अब केवल टीम तिमता था
मंगलवार, 5 मई 2009
दर्द है
dil e khana kharab ne
तोड़ना चाह भी हमने उस बेवफा से हर एक रिश्ता,
दिल ऐ खाना ख़राब ने ये होने भी न दिया
ख़ुद से थी दुसमनी की जो तुमसे मोहोब्बत करली,
अब बेवफा मैं हंस भी नही सकता और रो भी नही सकता
दिल ऐ खाना ख़राब ने ये होने भी न दिया
ख़ुद से थी दुसमनी की जो तुमसे मोहोब्बत करली,
अब बेवफा मैं हंस भी नही सकता और रो भी नही सकता
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