मंगलवार, 5 मई 2009

दर्द है

मेरा रिश्ता जब एक बेवफा से जुड़ गया
जीवन का हर रास्ता फ़िर बर्बदिया पे मुड़ गया
प्राणघातक आघात था पर फ़िर भी जिन्दा रह गया
हजारो खंजर मैं अपने मासूम दिल पे सह गया
मेरे दुःख दर्द का अब तो ये आगाज़ था
आग लगाने वाला मगर मासूम दगाबाज़ था
अब भी वो मुझसे प्यार की कसमे खता था
उसका प्यार ह बड़ा पवित्र ये भी वो दरसता था
भूल जा सब मुझसे ये गलती हो गई जान
मार के मुझको कहता ह की मुझको कातिल न जान
ये सब देख के मुझ को ख़ुद पे तरस आता था
जिन्दगी का दिया अब केवल टीम तिमता था

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